| December 9, 2022

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श्रावण में एक बार बराबर के पहाड़ जरूर जाये, पूजा के साथ पर्यटन भी होगा

श्रावण में एक बार बराबर के पहाड़ जरूर जाये, पूजा के साथ पर्यटन भी होगा
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श्रावण के महीने में शिव भक्त बाबा भोले को जल चढ़ाने जाते है। बिहार के भक्त मुख्य रूप में या तो सुल्तानगंज से गंगा जल ले के देवघर जाते है या पहलेजा घाट से जल ले के मुजफ्फरपुर में बाबा गरीबनाथ को जल चढ़ाते है। पर इसके अलावा भी कई ऐसे शिव मंदिर है जहाँ भक्तो की भारी भीड़ लगती है, ऐसा ही एक जगह है बराबर। बराबर पहाड़ पे बने शिव मंदिर में श्रावण के महीने भारी भीड़ लगती है।

बराबर पर्वत पे बने सिद्धेश्वर नाथ महादेव शिव मंदिर में आप बाबा भोलेनाथ को जल चढाने के साथ साथ बराबर की गुफाओ का भी दर्शन भी कर सकते है। सिद्धेश्वर नाथ महादेव शिव मंदिर एक प्राचीनतम शिव मंदिर है। सिद्धेश्वरनाथ को नौ स्वयंभू नाथों में प्रथम कहा जाता है। इनकी पूजन कथा शिवभक्त वाणासुर से संबंधित होने के कारण इसे ‘वाणेश्वर महादेव भी कहा जाता है। मंदिर तक जाने के लिए सीढीयां भी बनी हुई है। शिव मंदिर से चारो तरफ का नज़ारा बहुत ही मनोरम होता है।

बराबर में सात अदभुत गुफाएं भी बनी हुई है। इनमें से चार गुफाएं बराबर गुफाएं एवं बाकी तीन नागार्जुन गुफाएं कहलाती है। भारत में पहाड़ों को काट कर बनाई गयी ये सबसे प्राचीन गुफाएं है। पर्यटन के लिहाज से भी ये काफी उपयुक्त स्थान है। ये पर्वत सदाबहार सैरगाह के रूप में प्राचीन काल से ही चर्चित है। किंवदंतियों के अनुसार पर्वत पर बनी गुफाएं प्राचीन काल में ऋषि-मुनियों के ध्यान साधना लगाने हेतु सुरक्षा के दृष्टिकोण से बनाई गई थी। आस पास में ये गुफाये सतघरबा के नाम से जाने जाते है।

अशोककालीन गुफाओं में कर्ण चैपर गुफा, सुदामा गुफा, लोमस ऋषि गुफा, नागार्जुन गुफा सहित सात गुफायें हैं। गौरतलब है कि कर्ण चैपर, सुदामा और लोमस ऋषि गुफा एक ही चट्टान को काटकर बनाई गई हैं। देखने में अद्भुत लगने वाली ये गुफाएं प्राचीन समय की कलाकारी को दर्शाती हैं। गुफा के भीतर तेज आवाज में चिल्लाने पर काफी देर तक प्रतिध्वनियों सुनाए देती है, ऐसे अब गुफा के अंदर नहीं जाने दिया जाता है, आप बहार से इसे देख सकते है।

बारबर की गुफाओं को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया है। जिस विशाल चट्टान को खोदकर गुफाएं बनाई गई है उस पर लोगों की आवाजाही बनी रहती है। अक्सर पर्यटक यहां पिकनिक मनाने आते है। वैसे यहां सालों भी भक्तगण व पर्यटक आते रहते हैं लेकिन श्रावण मास, बसंत पंचमी एवं महाशिवरात्री अनंत चतुदर्शी में भक्तों व पर्यटकों की संख्या ज्यादा होती है।

बराबर गया से 24 KM उत्तर में है। यहाँ जाने के लिए पटना – गया मार्ग में दो रास्ते जाते। पहला रास्ता बराबर हाल्ट स्टेशन के पास से तो दूसरा रास्ता बेलागंज रेलवे स्टेशन के पास से जाता है। बेलागंज और मखदुमपुर से यहाँ जाने के लिए वाहन मिल जायेगे। यहाँ बिहार पर्यटन का कॉटेज बना है, पर उसमे सुबिधा के नाम पे कुछ नहीं है, वहां रुकने से बचे। आप सुबह जा के शाम से पहले आराम से लौट सकते है।

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