जर्जर मोइनुल स्टेडियम में रणजी ट्रॉफी मैच देखने पहुंचे हजारो दर्शक

जर्जर मोइनुल स्टेडियम में रणजी ट्रॉफी मैच देखने पहुंचे हजारो दर्शक

सालों बाद पटना के मोइनुल स्टेडियम में रणजी ट्रॉफी मैच खेला रहा है। मुंबई और बिहार के बीच एलीट ग्रुप के इस रणजी ट्रॉफी क्रिकेट मैच को देखने के लिए पहले दिन ही स्टेडियम में गजब का जोश दिखा। झारखंड से अलग होने के बाद बिहार की टीम पहली बार रणजी एलिट ग्रुप में शामिल हुई है।पर स्टेडियम की हालत देख, बिहार में खेल के लिए बिहार सरकार के दाबो की पोल खोल दी।

सोशल मीडिया पर मोइनुल हक स्टेडियम में कई फोटोज और वीडियोज भी वायरल हो रहे है, जहां स्टेडियम के खस्ताहाल की आलोचना की। पूर्व क्रिकेटर वेंकटेश प्रसाद का भी एक वीडियो रीपोस्ट किया, जिसमें वह यहां की व्यवस्था की आलोचना करते हुए नजर आए। स्टेडियम के चारों तरफ डेंजर जोन के छोटे-छोटे पोस्टर भी लगाए गए थे, लेकिन फैन्स का उत्साह ऐसे देखने के लिए सातवें आसमान पर था।  बैठने के लिए जो गैलरी बनाए गए थे, उसकी हालत भी काफी जर्जर हो चुकी है. इतना ही नहीं उन दीवारों के ऊपर पौधे उग आए हैं।

बिहार क्रिकेट एसोस‍ियन के अंदरखाने का विवाद भी इस मैच के लिए चर्चा में रही. दरअसल, मुंबई के ख‍िलाफ शुरू हुए इस मैच को खेलने के लिए बिहार की दो टीमें पहुंच गईं थीं। बिहार क्रिकेट एसोस‍िएशन (BCA)  के अध्यक्ष राकेश तिवारी के द्वारा एक टीम जारी की गई, तो दूसरी तरफ बर्खास्त सचिव अमित कुमार के द्वारा दूसरी टीम लिस्ट जारी कर दी गई थी। पुलिस बल की सख्ती के बाद बीसीए अध्यक्ष राकेश तिवारी द्वारा जारी किय गए लिस्ट के खिलाड़‍ियों ने मैच मे हिस्सा लिया।

इस स्टेडियम में इंटरनेशनल मुकाबले खेले जा चुके है। 90 के दशक मोइनुल हक स्टेडियम का इतिहास काफी सुनहरा रहा है। उस समय यहाँ तीन वनडे इंटरनेशनल मुकाबला खेला गया था। यहां पर पहला इंटरनेशनल मैच साल 1993 में जिम्बाब्वे और श्रीलंका के बीच खेला गया था, जिसमें श्रीलंकाई टीम को 55 रनों से जीत मिली थी. फिर 1996 के वर्ल्ड कप में 26 फरवरी को केन्या और जिम्बाब्वे का मैच खेला गया, जिसका कोई नतीजा नहीं निकल। इसके बाद 27 फरवरी 1996 को केन्या और जिम्बाब्वे के बीच फिर मैच खेला गया, जिसमें जिम्बाब्वे ने 5 विकेट से जीत हासिल की थी।

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